ईसाई नहीं। यहूदी या मुस्लिम नहीं।
हिंदू, बौद्ध, सूफी या जेन भी नहीं।
न किसी धार्मिक-सांस्कृतिक प्रणाली के तहत।
मैं न पूर्व से आया न पश्चिम से।
न समुद्र से निकला न उगा धरती पर।
न लौकिक, न अलौकिक।
किसी भी तत्व से
निर्मित नहीं हुआ मैं।
मेरा कोई अस्तित्व नहीं।
मैं न इस लोक का न परलोक का।
न आदम और हव्वा की संतान।
न सृष्टि की उत्पत्ति की
किसी कहानी की उपज।
मेरी कोई जगह नहीं
कहीं कोई निशान नहीं।
मैं जानता हूं तो केवल अपने प्रिय को।
मैंने दो दुनिया को एक की तरह देखा है।
और वह एक दुनिया पुकारती है
प्रथम, अंतिम, बाहरी, भीतरी,
केवल एक सांस को
हिंदू, बौद्ध, सूफी या जेन भी नहीं।
न किसी धार्मिक-सांस्कृतिक प्रणाली के तहत।
मैं न पूर्व से आया न पश्चिम से।
न समुद्र से निकला न उगा धरती पर।
न लौकिक, न अलौकिक।
किसी भी तत्व से
निर्मित नहीं हुआ मैं।
मेरा कोई अस्तित्व नहीं।
मैं न इस लोक का न परलोक का।
न आदम और हव्वा की संतान।
न सृष्टि की उत्पत्ति की
किसी कहानी की उपज।
मेरी कोई जगह नहीं
कहीं कोई निशान नहीं।
मैं जानता हूं तो केवल अपने प्रिय को।
मैंने दो दुनिया को एक की तरह देखा है।
और वह एक दुनिया पुकारती है
प्रथम, अंतिम, बाहरी, भीतरी,
केवल एक सांस को
सांस लेते इंसान को।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें