सोमवार, 27 दिसंबर 2010

सरकार कि अदालत,अदालत कि सरकार

सरकार कि अदालत,अदालत कि सरकार
ये कोई पहली दफा तो नहीं हुआ ! एक बिनायक  बाबु के ही साथ नहीं हुआ .ये निरंतर होता चल अरह है .
मुझे एक अदालत का वो फैसला भी याद अरह है जहाँ बलात्कारी पुरुष से पीडिता का विवाह करवाने का फैसला माननीय अदालत ने दिया था.पता नहीं क्यूँ मुझे तो हमेश फैसले सरकार के लगते है जैसे बाबरी मस्जिद का राजनीतगय फैसला ये फैसला तो मुझे अदालत का कम कांग्रेस का ज़यादा लगता है .सत्ता वाले गोलियां मारतें हैं और अदालत उम्र कैद दे रही . बिनायक  बाबु के सिलसिले में भी यही है कोई भी सरकार ये नहीं चाहती कि उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद (सलवा जुडूम ) को कोई संगठन या व्यक्ति टक्कर दे, ये पूजींवादी लोकतंत्र का किसी समाज वादी सोच से शंघर्ष है ही नहीं ये सिर्फ पुजिंवादी सभ्यता का हश्र है कि उसके सारे स्तभ आपस में गठजोड़ करके सत्ता कि निरंकुशता बरक़रार रखते है.

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

मस्जिद में धमाका मामले में इंद्रेश से पूछताछ

नई दिल्‍ली. हैदरबाद की मक्‍का मस्जिद में तीन साल पहले हुए बम धमाकों के सिलसिले में सीबीआई ने आज आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार से पूछताछ की। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की सेंट्रल वर्किंग कमेटी के सदस्‍य इंद्रेश ने जांच एजेंसी द्वारा की गई पूछताछ को कांग्रेस की ‘साजिश’ करार दिया। उन्‍होंने इस मामले में शामिल होने से भी इनकार किया है।

सीबीआई से पूछताछ के बाद इंद्रेश ने पत्रकारों से कहा, ‘एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत मेरे ऊपर तरह-तरह के आरोप लगाए गए हैं। मेरे जन्‍म और आरएसएस से जुड़ाव से लेकर अब तक मेरा जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। मैंने अपना जीवन राष्‍ट्र को समर्पित कर दिया है।’  उन्‍होंने कहा, ‘पिछले कई वर्षों से कांग्रेस पार्टी और इसके कुछ नेता आरएसएस और मेरी छवि खराब करने की साजिश रच रहे हैं जिसका भंडाफोड़ विकीलीक्‍स के जरिये भी हो गया है।’

18 मई 2007 को मक्‍का मस्जिद के भीतर जुमे की नमाज के दौरान हुए बम धमाकों में 9 लोगों की मौत हो गई थी और 70 घायल हुए थे। इस मामले की जांच में जुटी सीबीआई ने पूछताछ के लिए सीआरपीसी की धारा 160 के तहत इंद्रेश को नोटिस भेजा था। इंद्रेश ने कहा, ‘हिंदुओं और भगवा संगठनों को आतंकवादी बताकर इनकी जांच करना पूरी तरह गलत है और हिंदू समुदाय के लिए अपमान है।’ 
सीबीआई ने इस मामले में हैदराबाद की अदालत में 18 दिसम्‍बर को देवेंद्र गुप्‍ता और लोकेश शर्मा के खिलाफ हत्‍या और अन्‍य मामलों में चार्जशीट दायर की। ये दोनों अजमेर दरगाह में हुए बम धमाकों में इंद्रेश के साथ आरोपी हैं।

मक्‍का मस्जिद धमाका मामले के मुख्‍य अभियुक्‍त संदीप डांगे और रामचंद्र कलसांग्रा उर्फ रामजी अभी फरार हैं जबकि अन्‍य अभियुक्‍त स्‍वामी असीमानंद से सीबीआई पूछताछ कर रही है। असीमानंद पर समझौता एक्‍सप्रेस में हुए धमाके का भी आरोप है।

गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

हमें आप को एक मंच मिल गया अपनी दिमागी खुजली मिटने के लिए

किसी मित्र ने पूछा था ब्लॉग कथा बहुत लिखी जारही है थोडा प्रकाश डाले .उसी कि उपलक्ष में में कुछ लेने मार रहा हूँ
आप दिमाग का इस्तेमाल लगा के ना पढ़ें ऐसी विनती है.
तो भाई साहब आप को क्या लगता है भला हो इस ब्लॉग का कि हमें आप को एक मंच मिल गया अपनी दिमागी खुजली मिटने के लिए है ना? अरे जनाब सच तो यही है अगर इस दौर में ये ब्लॉग ना होते तो नजाने कितनी सफ़ेद कोरे कागज़ का balatkar kar chuki होते ham jaise buddh jivi  aur नजाने kitne pedo का vinash karta padta hamare लिए कागज़ uddyuog को /
अरे भाई साहब आप mazak samajhte hain hain aapko कुछ pata है har एक din kitne hazar panne jud jate है इस maya jaal में,aur usme se karodo ये dawa karte है कि wo sahhity कि rachna kar rahen है(note-ये wahiyat khyal mujhe bhi aksar aata है).
mijhe chhama karen ये लेने likhne के लिए ये internet का बहुत bada upkar है hampar के ये sahhity kitab कि shakl nahi leraha warna ये condom में pade ajanme lekhak हमें sahity के naam par क्या dete uska tassur hi kiya jasakta है,

बुधवार, 15 दिसंबर 2010

mai kahan raha?

 Itihas me aise mauke zeyada aye ,jab bahumat,ghalat chizo par ekmat raha,un mauko par mai kis taraf raha? 

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

sirf ik sher

यादो की बरीश होती है जब भी
मै भीगता ज़रूर हूँ ,मगर पलकों की हद तक

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

अवसाद समझते  हैं ना कामरेड ? हाँ वही होगया है हमें
अब आप कहतें हैं हम बाज़ार कि गिरफ्त में हैं
अरे कामरेड बाज़ार पानी कि तरह होता है. अपना रास्ता बना ही लेता है
लो देखो ये मेरी नीली डायरी कल मैंने पन्ना पलता तो पता चला कि आखरी पन्नो में
मेरे दफ्तर का काम दर्ज था
.............हद होती है दखल कि भी ;
बस मैंने तो इसी बात से अपनर आप को समझा लिया कि चलो
अभी भी बाज़ार आखरी पन्नो पर है
......लेकिन मुआ कब अन्दर ही अन्दर पन्ना बदल ले कह नहीं सकते
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इधर कई दिनों से खबरों से दूर था और सचमुच एक छोटी दुन्य में...........या चलो बता देता हूँ
एक तहखाने (बेसमेंट) में जी रहा था.
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वैसे मै ऐसे लोगो के बीच फस हूँ हूँ कामरेड कि पुचो मत;
नज़र ना लगे बड़े जिंदादिल बन्दे हैं बहुत अच्छे.
      एक हम थे बचपन से दुन्य जहाँ के जहाज़ उदय करते थे
उम्र से बड़ी बातें;बहेस,महफ़िल,
और खुदा सलामत रखे एक ये बन्दे हैं
इतनी सीधी इतनी सपाट ज़िन्दगी;
पाश कि एक कविता याद आगे इनके ऊपर
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वसे अगर किसी दिन मेरी सोच उनलोगों के समझ में आगे तो मेरा क़त्ल वाजिब हो जायेगा उनके ऊपर;
लेकिन ये किरदार जिंदा मिसाल हैं इन लीनो के कामरेड
.....................................सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनो का मर jana