o jessica, o my jessica.
बहुत अच्चा है प्रिये
कि तुम परलोक में हो
हमने और भी तलाशा है
हर रोज़ दो- चार इसी शहर में
तुम कितनी आसानी से मिल जाती हो
हमारी खून कि प्यास बुझाने को
और हमें "ठंडा गोश्त" पसंद भी नहीं
हे प्रिये तुम धन्य हो ,
पहले मेरी कुंठा के काम आई
फिर मेरी सनक के
और सबसे अधिक तो टी.आर.पी के
अब मै तुम्हारी कहानी बेचुंगा
फिर हम सब तुम्हे दोबारा सिल्वर स्क्रीन पर क़त्ल करेंगे
दिन में चार बार तुम्हारी अस्मत से खेलेंगे
दफ्तर में और चौराहे पर उसके कला पहलु पर चर्चा भी होगी
और उसी बीच दो चार और मिल जाएँगी
नै कहानी बेचने को
इसी शहर में आसानी से
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