कल या कल के पहले कभी तुमने इतनी गंभीरता से पहले नहीं सोचा होगा ,पर अब सोचना अगर तुम मेरी महबूबा हो तो क्या बात है की मैं जंगलो में जाना चाहता हूँ !क्यं मै जाना चाहता हूँ उस बस्ती में जहाँ काली छाया
रहती है !बस क्यूँ दुनया से लड़ने में ही शहीद होजाना चाहता हूँ मै!जीत की अकंछा क्यं नहीं पाली मैंने ! मै क्यूँ चाहता हूँ की जिन रास्तो पर चलूं वहां सिर्फ रेत ही रेत हो दोपहर के सूरज से गर्म और मै नंगे पांव उसमे उतर के भटक जाऊ !जंग इतनी सख्त तो नहीं है !आज और आज के बाद इस बारे में ज़रूर सोचना !तबतक मै फिर तुम्हारे सपने में आने की कोशिश करूँगा ज़िन्दगी ,अभी तो बस जंग के ख़त्म होने की दुआ कर रहा हूँ !
रहती है !बस क्यूँ दुनया से लड़ने में ही शहीद होजाना चाहता हूँ मै!जीत की अकंछा क्यं नहीं पाली मैंने ! मै क्यूँ चाहता हूँ की जिन रास्तो पर चलूं वहां सिर्फ रेत ही रेत हो दोपहर के सूरज से गर्म और मै नंगे पांव उसमे उतर के भटक जाऊ !जंग इतनी सख्त तो नहीं है !आज और आज के बाद इस बारे में ज़रूर सोचना !तबतक मै फिर तुम्हारे सपने में आने की कोशिश करूँगा ज़िन्दगी ,अभी तो बस जंग के ख़त्म होने की दुआ कर रहा हूँ !
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