सजदे जो आवारा हो गए ...............
शनिवार, 11 जून 2011
कबतक बम बनवाते रहोगे आदम ,,,
क्या हमेश खुश ख्याल रहोगे आदम
कबतक प्यार को फूल, रोटी को खुशामद और क्रांति को रेस्टारेंट कहोगे.
बढ़ के इब्लीस को क्यं नहीं बताते,
मेरे बच्चे बारूद नाहे खाते
कबतक बम बनवाते रहोगे आदम ,,,
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