सोमवार, 13 जून 2011

ऐ मेरे हुसैन ! (A tribute to M.F HUSAIN)

ऐ मेरे हुसैन !
तुम्हारे शफ्फाक कनवास पर जो रंग है ,
उनमे ये रंग क्या ज़रूरी था 
जिनमे  हर सियाह रंग वाले ,हरे, केसरया झंडो वाले,
लहू के रंग धुलते हैं 
ऐ मेरे हुसैन !
तुम्हारी स्केच बुक में ;जिसमे परतो में आड़ी-तिरछी रेखाए होती हैं 
क्या ये रेखाए भी ज़रूरी थीं 
जिनसे खद्दर और खाकी वाले ज़मीन पर रेखाएं बनाते है 
और उनको दिलो में पेवस्त कर देते है ........

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