ऐ मेरे हुसैन !
तुम्हारे शफ्फाक कनवास पर जो रंग है ,
उनमे ये रंग क्या ज़रूरी था
जिनमे हर सियाह रंग वाले ,हरे, केसरया झंडो वाले,
लहू के रंग धुलते हैं
ऐ मेरे हुसैन !
तुम्हारी स्केच बुक में ;जिसमे परतो में आड़ी-तिरछी रेखाए होती हैं
क्या ये रेखाए भी ज़रूरी थीं
जिनसे खद्दर और खाकी वाले ज़मीन पर रेखाएं बनाते है
और उनको दिलो में पेवस्त कर देते है ........
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