किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम को आब आहिस्ता आहिसता
की आतिश गुल को करती हैग़ुलाब गुल-आब आहिस्ता आहिसता
अजब कुछ लुत्फ़ रख़ता है शब्-ए-ख़िल्वत मे दिलबर सों
सवाद सवाल आहिस्ता आहिस्ता, जव़ाब आहिस्ता आहिसता
मेरे दिल को किया बेख़ुद तेरी अँखियाँ ने आख़िर कों
केज्यों जूँ बेहोश करती है शराब आहिस्ता आहिसता
अदा-ओ-नाज़ सो आता है वो रोशन-जबीं घर सों
के ज्यूँ अँखियाँ मले आता है ख़ाब आहिस्ता आहिसता
की आतिश गुल को करती है
अजब कुछ लुत्फ़ रख़ता है शब्-ए-ख़िल्वत मे दिलबर सों
मेरे दिल को किया बेख़ुद तेरी अँखियाँ ने आख़िर कों
के
अदा-ओ-नाज़ सो आता है वो रोशन-जबीं घर सों
की ज्यों जूँ मशरिक़ से निकले आफ़ताब आहिस्ता आहिसता
“वली” मुझ दिल मे आता है ख़याल-ए-यार बे-परवाहके ज्यूँ अँखियाँ मले आता है ख़ाब आहिस्ता आहिसता
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