सोमवार, 13 जून 2011

कहाँ खो गए तुम ,ए मेरे ख़वाब !!

ए मेरे ख़वाब !!
कहाँ खो गए तुम 
याद है मुझको जब तुमने मुझसे कहा था, 
तुम तन्हा नहीं  हो
दुनया क्या सोचती है ये मत सोचो  
तुम्हारी जुस्तुजू तुम्हारे साथ है 
मुझे जीने का हुनर तुमने सिखाया
मंजिलों तक पहुँचने का रास्ता बता कर 
फिर आज क्यूँ तुम मुझसे बिछड़ गए  ?
तुम्हारी दुआओ से मंजिल मिल गयी मुझको 
लेकिन तुम मेरे ख्वाब !
तुम कहाँ खो गए ?

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